Friday, 23 July 2010

दो नयन..








जीवन के सम्पूर्ण रहस्यों से भरे
दो सागर...
मौन....
किन्तु चंचल, गहरे, सुन्दर
और विषैले,
चन्दन से शीतल भी,
और अंगारों से ऊष्ण भी..
मेरे ये दो नयन....!!

जिनमे आकर्षण भी है
और प्यार भी....
और प्यार की तीव्र
प्यास की खार भी.

ये खार...
ये आंसू..
जो आँखों में मंडराते
भावनाओ के मेघ.....
व्यथा की हलकी ठेस से भी
फूटे पड़ते हैं ...!

यह अविरल प्रवाह
इन पलकों के बंधन
तोड़ देते हैं ...!

बेबसी के से ये स्त्रोत
प्रेम में लिपटी विषाक्त
धरा से....
अंगारों सी जलन लिए हैं ..!

आशा की
हिमगिरी की कोख से
जन्मे..ये आंसू..
कहा से उमड़ते हैं ..
यही रहस्य है..???

अश्रुकणों से भरपूर
झुलसी ये आँखे..
और हिम की घाटियों से
पिघल कर आती ये मन्दाकिनी

मैं सोचती हूँ ....
ये नयन...
तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!


53 comments:

SHILPA DHAMUNIYA said...

bhut khub

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति.....बीच की कुछ पंक्तियाँ दो बार दिखाई दे रही हैं...


बेबसी के से ये स्त्रोत
प्रेम में लिपटी विषाक्त
धरा से....
अंगारों सी जलन लिए हैं ..!

आशा की
हिमगिरी की कोख से
जन्मे..ये आंसू..
कहा से उमड़ते हैं ..
यही रहस्य है..???

आशा की
हिमगिरी की कोख से
जन्मे..ये आंसू..
कहा से उमड़ते हैं ..
यही रहस्य है..???

अश्रुकणों से भरपूर
झुलसी ये आँखे..
और हिम की घाटियों से
पिघल कर आती ये मन्दाकिनी

anupama's sukrity ! said...

भावपूर्ण सुंदर -गहरी आँखों सी गहरी रचना

संजय भास्कर said...

मैं सोचती हूँ ....
ये नयन...
तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!

गजब कि पंक्तियाँ हैं ...

बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

संजय भास्कर said...

बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पार आना हुआ

मनोज कुमार said...

मौन....
किन्तु चंचल, गहरे, सुन्दर
और विषैले,
चन्दन से शीतल भी,
और अंगारों से ऊष्ण भी..
इस कविता की व्याख्या नहीं की जा सकती। कोई टीका नहीं लिखी जा सकती। सिर्फ महसूस की जा सकती है। इस कविता को मस्तिस्क से न पढ़कर बोध के स्तर पर पढ़ना जरूरी है – तभी यह कविता खुलेगी।

M VERMA said...

आशा की
हिमगिरी की कोख से
जन्मे..ये आंसू..
कहा से उमड़ते हैं ..
यही रहस्य है..???
आंसू के उमड़ने का रहस्य तो रहस्य ही है क्योकि कब ये उमड़ेंगे पता नहीं
बहुत सुन्दर रचना

Avinash Chandra said...

मैं सोचती हूँ ....
ये नयन...
तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!


tadtadtadtadtad........... taaliyaan sun rahi hain :)

kshama said...

मैं सोचती हूँ ....
ये नयन...
तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!
Aprateem!Mere paas alfaaz nahin!

Deepak Shukla said...

Hi..

Nayanon ki bhasha ko, tumne shabdon main bandha hai..
Tumne badi madhurta se,
nayanon ki di paribhasha hai..

Kavita aadi se ant tak rochak hai tatha utardh main bahut hi khubsurat bani hai..

Aisi hi madhur kavitayen likhti rahen..

Deepak..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अनामिका जी, आज आप फिर से आँसू का ब्यथा कथा लेक्र आई हैं..लेकिन आज हम बोलेंगे कि आप आँसू का खाली एक पक्ष का बात की हैं, व्यथा का... लेकिन सोचिए तो कि ई आँसू तो कोई प्यार से दूगो बात भी बोल देता है त निकल जाता है... कभी कभी त एतना खुस हो जाता है मन कि आँख से पानी बहने लगने लगता है, लेकिन हमरा दावा है कि ऊ आँसू कभी खारा नहीं होता होगा..
चलिए, हमरात आदत है बकवास करने का... आपका कबिता बहुत सुंदर लगा … सब्द सब्द गीला!!

Sadhana Vaid said...

बहुत ही प्यारी रचना ! बहुत गहरी, खूबसूरत और संवेदना से भरपूर ! मेरी बधाई स्वीकार करें !

Shah Nawaz said...

बहुत खूबसूरत एवं भावपूर्ण रचना, बहुत खूब!

रचना दीक्षित said...

मैं सोचती हूँ ....
ये नयन...
तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!
अनामिका क्या बात है आज फिर से आंसू की व्यथा कथा वही मैं कहूँ की आज दिल्ली में अचानक फिर तेज बारिश क्यों हुई. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

गिरीश बिल्लोरे said...

इन नयनों की चमत्कारी शक्ति को कौन नहीं जानता वाह... हर एंगल से प्रभावी रचना

Udan Tashtari said...

बहुत प्रभावी!!

veerubhai said...

raag ,viraag ,anuraag ,ye saari kaaynaat ,in aankhon me hi to hai ,
ye vrindaavan ,ye deth velee yahin kahin in alsaai ,uneendi aankhon me hi to hai ,
zaraa aankhon ke paar ,aankhon kaa atikraman karke bhi to dekho -
us paar bhi hai ek kaaynaat ,ek nai duniyaa ,
sooni maang si ,bairaag liye ,tan kaa ,man kaa .
sundar bhaav abhivyakti ke liye badhaai .
veerubhaai

Madhu chaurasia, journalist said...

अच्छी रचना...

बेचैन आत्मा said...

इन नयनों ने कवियों को बहुत बेचैन किया है.
..आपकी बेचैनी भी अच्छी लगी.

CS Devendra K Sharma said...

kavita ke sath sath diye gaye chitro k nayano ne bhi bahut kuch bayan kar diya.......

kisi ne kaha bhi hai..."ragon me daudte firne ke hm nahi kaayal, jo aankh hi se na tapka to lahu kya hai..!!!"

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर रचना.

'अदा' said...

बहुत खूबसूरत एवं भावपूर्ण रचना, बहुत खूब!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

एक खूबसूरत और भावनात्मक रचना के लिए बधाई !

हास्यफुहार said...

बहुत मार्मिक कविता।

प्रवीण पाण्डेय said...

व्याकुल भावों की समुचित प्रस्तुति।

मिताली said...

ये खार...
ये आंसू..
जो आँखों में मंडराते
भावनाओ के मेघ.....
व्यथा की हलकी ठेस से भी
फूटे पड़ते हैं ...!

ye aansu jab bhawnaon ke sath vyatha ko leke aankhon me baste hain to mann ke dukhte hi avikal bah chalte hain....
bahut khoob panktiyan rachi gayi hain aapke dwara.... aabhar..

ज्योति सिंह said...

मैं सोचती हूँ ....
ये नयन...
तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!
गहरे राज़ से भरे होते है नयन दोनो और भावनाओ का गहरा समुन्दर भी होते है , तभी तो व्याकुल रहते है .बहुत खूब लिखी हो .सुन्दर अति सुन्दर .

sanu shukla said...

बहुत ही उम्दा रचना...!!

Ravi Rajbhar said...

Bahut sunder......
bahut dino baad aapka blog visit kiya...!
nai rachnao se man taro-taja huwa

www.ravirajbhar.blogspot.com

वन्दना said...

दो नयनों को बहुत ही खूबसूरती से परिभाषित किया है……………नयनो की भाषा को बहुत ही सुन्दरता से बाँधा है।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

do naina....ik kahani ...thoda sa badal thoda sa pani ...

aapne bhi aankhon ki aankhon me aaknhen daal kar unki kahani padh li di ...:)

mridula pradhan said...

bahut sunder.

राजेश उत्‍साही said...

अनामिका जी ऐसा लगता है यह अभिव्‍यक्ति आपने अपनी तस्‍वीर देखकर की है। तस्‍वीर और कविता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। बधाई।

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

वाणी गीत said...

रहस्य ही तो है ..इनमे कहाँ से आंसू उमड़ते हैं ...
किस रहस्य के प्रतिबिम्ब है ...
ये नयन ...
गीत याद आ रहा है ..." ये नयन भरे- भरे "

अमिताभ मीत said...

तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!

बहुत ख़ूब ! बेहतरीन रचना !!

अरुणेश मिश्र said...

नयन पर उत्कृष्ट रचना ।

rashmi ravija said...

तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके
व्याकुल जीवन की
प्यास हो..!!
कमाल कि पंक्तियाँ हैं...बेहद संवेदनशील रचना

डा. अरुणा कपूर. said...

आशा की
हिमगिरी की कोख से
जन्मे..ये आंसू..
कहा से उमड़ते हैं ..
यही रहस्य है..???
एक उत्कृष्ट शब्दों की माला...मेरे सामने है, बधाई!

दिगम्बर नासवा said...

इन नयनों की भाषा समझना भी आसान नही है .... बहुत रहस्य है इन आँखों में ... सुंदर अभिव्यक्ति है ...

अनुभूति said...

अश्रुकणों से भरपूर
झुलसी ये आँखे..
और हिम की घाटियों से
पिघल कर आती ये मन्दाकिनी

dil ki gahraiyon se nikale bhav ,khubsurat

सुमन'मीत' said...

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ................।ये आंखेँ दिल का आइना होती हैं और इस आइने में आपने तस्वीर को बड़ी गहराई से उतारा है ............

मै नीर भरी said...

वाह आपने आँखों पर रच रच कर लिखा . बहुत खूब लिखा . बधाई लीजिये

RAJWANT RAJ said...

ritikal our bhktikal ki rchnaon me part of body pr bhavnatmk astr pr likha jata tha . wah anamika ! kya khoob likha hai .

RAJWANT RAJ said...

chrcha mnch ki prstuti ki bat hi kya hai . vykti vishesh ko prtikatmk roop me prstut krna ek anootha pryas tha. samgri bhi pthney our prshnshneey thi .
bdhaiyan .

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बहुत बढ़िया.

Parul said...

waah anaamika..kya baat hai!

महफूज़ अली said...

बहुत गहराई लिए हुए भावपूर्ण कविता.... आपने निःशब्द कर दिया....

Babli said...

वाह! क्या बात है! बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा रचना लिखा है आपने!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

तुम किस रहस्य के प्रतिबिम्ब हो ?
किसके प्यार की आभा हो
और किसके..व्याकुल जीवन की..प्यास हो..
नयनों को प्रती बनाकर........
कितनी खूबसूरत रचना पेश की है आपने.

alka sarwat said...

बड़ी प्यारी सी रचना है भाई
अनामिका जी बधाई स्वीकारें

KESHVENDRA said...

Shukriya Anamika ji, Bahut hi marmik kavita likhi hai aapne.

Rajat Narula said...

bahut hi umda rachna hai !