Wednesday, 10 August 2011

वो चुप रहें तो ....100 वीं पोस्ट

Share



साथियो, आज यह मेरी  100 वीं पोस्ट है...इसलिए कुछ उदासीनता भरा या आक्रोश भरा लिखने की बजाय सोचा कि क्यूँ न कुछ अच्छा अच्छा सा, मंद मंद ठंडी बयार जैसा कुछ लिखा जाए...तो प्रस्तुत है मेरी ये कोशिश आपके समक्ष ....

थोड़ी देर पहले ये गाना सुना....

वो चुप रहें  तो मेरे दिल के  दाग जलते हैं ...
वो मुस्कुरा  के  देख लें तो बुझते चिराग जलते हैं....

सच मे बहुत अच्छा लगा....बहुत दिनों  बाद ये गीत जब एक बार फिर सुनने को मिला तो  दिल किया की इसी तरह की ज़रा हम भी कोशिश कर लें.......



वो  चुप चाप यूँ  बैठे क्यूँ  हैं...
पलकों को झुकाए, होठों में पैगाम दबाए..
आँखों में शरारत, रुखसारों की चमक छुपाये 
वो  चुप चाप यूँ  बैठे  क्यूँ हैं......

मेरे सब्र के  प्याले  छलके से  जाते हैं....
वो  कुछ  कहें  तो थोड़ा चैन पाते हैं...
दिल की बेकरारी भी हदों से पार जाती  है ...
चैन आ जाए  गर वो मुझसे बात करते हैं ..

बेताब  धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...
मेरी हर सहर अंधेरो में डूबी जाती है..
वो कुछ कहें तो रोशनी सी ये रूह पाती है..

'उदास'  की उदासी को वो बढ़ाते क्यूँ हैं ..
और हो जाऊंगी उदास वो ये जानते भी हैं ..
ग़मों से छंटकर आज कुछ एहसास जगे हैं 
करीब आयें, तभी  तो  फांसले सिमटते हैं.

वो  चुप चाप यूँ  बैठे क्यूँ  हैं...
पलकों को झुकाए, होठों में पैगाम दबाए..
आँखों में शरारत, रुखसारों की चमक छुपाये 
वो  चुप चाप यूँ  बैठे  क्यूँ हैं......


70 comments:

Vivek Jain said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई, आपका ब्लॉग इसी तरह दिन दूना रात चौगुना बढ़ता रहे,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Rakesh Kumar said...

बहुत अच्छा जी
आपने १०० वीं पोस्ट बहुत शानदार
ढंग से प्रकाशित की है.
बहुत बहुत बधाई और हार्दिक
शुभ कामनाएं.
सुन्दर सकारात्मक लेखन अनवरत
जारी रहे और ब्लॉग जगत को आप सदा
प्रकाशित करतीं रहें येही दुआ और कामना है.

डॉ. मोनिका शर्मा said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई....शुभकामनाएं....

वाणी गीत said...

बहुत बधाई एवं शुभकामनायें ...पोस्ट के आगे शून्य का आंकड़ा बढ़ता ही जाए !

Rajesh Kumari said...

बेताब धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...
मेरी हर सहर अंधेरो में डूबी जाती है..
वो कुछ कहें तो रोशनी सी ये रूह पाती है
bahut pyari ghazal bahut shaandar.100vi post ki dheron badhaai.

sushmaa kumarri said...

बहुत ही खुबसूरत पोस्ट....

Satish Saxena said...

शुभकामनायें आपको !

मनोज कुमार said...

१०० वी पोस्ट की बधाई जी!

गीत क्या है लग रहा है मन के भावनाओं की ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति।

पढते-पढते एक गाना याद आ गया ..
वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों मे समाए रहते हैं ...

प्रवीण पाण्डेय said...

100 वीं पोस्ट की बहुत बधाई, सुन्दर और आत्मीय गीत के साथ।

Unknown said...

अनामिका जी १०० वी पोस्ट के लिए बधाई , आपने बेहतरीन साहित्य लिखा है शुभकामनाये. इस भावनात्मक पोस्ट के लिए भी

केवल राम said...

बेताब धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...


वाह ...वाह क्या बात है ....उनके लवों का हिलने में वक़्त लेना ....!

Unknown said...

बहुत प्यारी रचना १००वीं पोस्ट के लिए बंधाई ..

रश्मि प्रभा... said...

chehre pe apne bhi muskaan daud gai...

संजय भास्‍कर said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

संजय भास्‍कर said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बहुत बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

अच्छी रचना है!
100वीं पोस्ट की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

vandan gupta said...

मन के कोमल भावो की सुन्दर प्रस्तुति।
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Maheshwari kaneri said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई,ऐसे ही खुबसूरत पोस्ट लिखती रहे....

अरुण चन्द्र रॉय said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई, आपका ब्लॉग इसी तरह बढ़ता रहे

Asha Lata Saxena said...

100 वी पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई |
आशा

|

Anju (Anu) Chaudhary said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई

चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए ....पूरी रचना पढ़ डाली
बहुत अच्छा लिखा है ........आभार

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

बहुत बहुत बधाई।
पोस्ट भी बहुत अच्छी लगी।

सादर

Dr (Miss) Sharad Singh said...

खूबसूरत रचना और ...
100 वी पोस्ट पर आपको हार्दिक बधाइयां एवं हार्दिक शुभकामनायें .

Anonymous said...

बहुत ही खुबसूरत अहसासों को समेटे ये पोस्ट लाजवाब है |

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

एहसास खूबसूरती से उकेरे हैं ...

१०० वीं पोस्ट के लिए बधाई

नीरज गोस्वामी said...

पहले शतक की बधाई...दुआ करते हैं के आप शतकों का शतक लगायें...

नीरज

Anupama Tripathi said...

१०० वीं पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई...
और इतनी खूबसूरत रचना के लिए भी..!!

mridula pradhan said...

aapki kavita bahut pyari lagi.....aur 100 post pura hone per badhayee.

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर रचना , बहुत खूबसूरत प्रस्तुति अंदाज बधाई

Dr Varsha Singh said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई.....
आपका ब्लॉग सफर यूं ही चलता रहे....
बहुत-बहुत शुभकामनायें ...

ताऊ रामपुरिया said...

शतक जमाने के लिये हार्दिक बधाई, दोहरे शतक की अग्रिम बधाई.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया said...

बेताब धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...
मेरी हर सहर अंधेरो में डूबी जाती है..
वो कुछ कहें तो रोशनी सी ये रूह पाती है..


इस शानदार गजल के लिये पुन: बधाई, बहुत ही लाजवाब रचना.

रामराम

Minakshi Pant said...

आपने अपनी मंजिल पर चलते १०० शानदार शतक लगा लिए सुनकर बहुत अच्छा लगा आपको हमारी तरफ से बहुत - बहुत बधाई हम आपके ऐसे ही आगे बढते रहने कि कामना करेंगे दोस्त |
बहुत खूबसूरत रचना |

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

behtarin shatak,,,shatak se pahle ka ek run banane mein sachin ki badhi dhadkano ki tarah meethe meeth dard ka ahshas karata hua shandar prayas..rachna ke liye bhi aaur shatak ke liye bhi badhayee

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

.




१०० वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई !
और हार्दिक
शुभ कामनाएं !

Sadhana Vaid said...

१०० वीं पोस्ट के लिये बहुत प्यारी और मधुर रचना चुनी है आपने ! सौ का आंकड़ा छूने के लिये और इतनी आत्मीयता पूर्ण स्निग्ध रचना के लिये हार्दिक बधाई एवं अभिनन्दन !

vidhya said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई....शुभकामनाएं....

संध्या शर्मा said...

आँखों में शरारत, रुखसारों की चमक छुपाये वो चुप चाप यूँ बैठे क्यूँ हैं......
100 वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई...

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

Sawai Singh Rajpurohit said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई/शुभकामनाएं!!

Sawai Singh Rajpurohit said...

मेरे इस ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है!!

ब्लॉग की 100 वीं पोस्ट पेश करते हुए मुझे खुशी और हर्ष हो रहा है!

यहाँ प्रतिदिन पधारे

निवेदिता श्रीवास्तव said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई .......

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

ये चुप सी क्यूं लगी है अजी कुछ तो बोलिए!!

रचना दीक्षित said...

सौंवी पोस्ट बहुत शानदार रही. बधाई और शुभकामनायें. डबल सेंचुरी और भी तेज़ी से बने यही कामना.

Udan Tashtari said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर रचना और १०० वी पोस्ट की हार्दिक बधाई...
सादर...

Anonymous said...

Dr.Rama Dwivedi

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई.....
और हार्दिक
शुभ कामनाएं.

Kailash Sharma said...

१००वीं पोस्ट की बधाई..कोमल अहसासों से परिपूर्ण रचना अंतस को छू जाती है. आभार

Anupama Tripathi said...

शनिवार को आपकी पोस्ट की चर्चा हलचल पर है ...!कृपया अवश्य पधारें....!!

रजनीश तिवारी said...

वो चुप चाप यूँ बैठे क्यूँ हैं...
पलकों को झुकाए, होठों में पैगाम दबाए..
आँखों में शरारत, रुखसारों की चमक छुपाये
वो चुप चाप यूँ बैठे क्यूँ हैं......
बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ ..

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर सारगर्भित
रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता दिवस के पावन पर्वों की हार्दिक मंगल कामनाएं.

Amrita Tanmay said...

वाह क्या बात है। बहुत खूब |100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई|

ज्योति सिंह said...

dhero badhai post aur rakhi parv ki ,

Kunwar Kusumesh said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई,

Manish Kumar Khedawat said...

sunder geet !!
badhai ho , is 100v post pe :)

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

बहुत बहुत शुभकामनाएं अनामिका जी, गीत बहुत अच्छा है...
रक्षाबंधन पर्व की बधाई.

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी said...

बेहद खूबसूरत रचना.....शुभकामनाएं । 100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई.....

!!अक्षय-मन!! said...

बहुत बहुत बधाइयाँ जी,
बहुत जबरदस्त लिखा है
दिल को कहते शब्द
प्रेम-पीढा सब कुछ कहते ये शब्द

कई जिस्म और एक आह!!!

Nirantar said...

वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग जलते हैं ...
वो मुस्कुरा के देख लें तो बुझते चिराग जलते हैं....
उनको यही अंदाज़
ना मरने देता ना जीने देता
निरंतर बेचैन रखता

आपको १०० पोस्ट पर बधायी

Sunil Kumar said...

100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई,शुभकामनाएं....
हजारवी पोस्ट का इंतजार रहेगा ....

Dr Varsha Singh said...

100 वीं पोस्ट की बहुत-बहुत बधाई.... और शुभकामनाएं....

साथ ही स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

virendra sharma said...

बेताब धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...
मेरी हर सहर अंधेरो में डूबी जाती है..
वो कुछ कहें तो रोशनी सी ये रूह पाती है..

यौमे आज़ादी की साल गिरह मुबारक ,"खूबसूरत शब्द चित्र आशिक -माशूक के बीच "मौन संवाद का नैनों से नैनों की कही -बतकही का .खूबसूरत अंदाज़ आपके ,मुबारक .कृपया यहाँ भी दस्तक देवें -
ram ram bhai

रविवार, १४ अगस्त २०११
संविधान जिन्होनें पढ़ा है .....
Sunday, August 14, 2011
चिट्ठी आई है ! अन्ना जी की PM के नाम !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Dorothy said...

देर से आने के लिए क्षमाप्रार्थी हूं...100वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई.... स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
सादर,
डोरोथी.

Unknown said...

बेताब धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...
भावों एवं शब्दों को सुन्दर समन्वयन ..सुन्दर कोमल रचना ...१०० वीं पोस्ट के लिए हार्दिक बधाईयां ...मंगलकामनाएं !!!

Rahul Paliwal said...

उनकी चुप्पी आपमे ये रचना बन छलकी.

आनन्द विश्वास said...

सचिन तेंदुलकर शतक न लगा सके,
तो दुःख हुआ, लेकिन आपके शतक से
काव्य जगत को प्रशन्नता तो अवश्य
ही हुई है. हर बार आप शतक बनाएँ.
ऐसी शुभ कामनाओं के साथ.
आनन्द विश्वास.

Satish Saxena said...

हम सबके अन्दर एक चंचल बच्चा रहता है जिसे हम गंभीरता और तथाकथित दुखों के आवरण में दबा देते हैं ! इससे बड़ा एक आत्मा के साथ अन्याय नहीं हो सकता ! उसे बाहर निकालें और मुक्त वातावरण में छोंड दें ....
नयी सुन्दर अभिव्यक्तियाँ जन्म लेंगी ....
शुभकामनायें आपको !

शरद कोकास said...

100 वीं पोस्ट की बधाई

दिगम्बर नासवा said...

बेताब धड़कनों का शोर बढ़ता जाता है....
उनके लब हैं कि हिलने में भी वक़्त लेते हैं...
मेरी हर सहर अंधेरो में डूबी जाती है..
वो कुछ कहें तो रोशनी सी ये रूह पाती है..

१०० वीं पोस्ट खामोशी की जुबां लगती है ... बहुत कमाल की रचना ... बधाई ...